छत्तीसगढ़ में जमीन के खसरा या रकबा में त्रुटि सुधार (दुरुस्ती) कराने की पूरी प्रक्रिया

छत्तीसगढ़ में जमीन से जुड़े दस्तावेजों का डिजिटलीकरण होने के बाद से किसानों और भू-स्वामियों को कई सुविधाएं मिली हैं। अब 'भुइयां' (Bhuiyan) पोर्टल के जरिए खसरा, बी-1 (खतौनी) और नक्शा आसानी से ऑनलाइन मिल जाता है। लेकिन कई बार कम्प्यूटरीकरण के दौरान टाइपिंग की गलती या पुराने रिकॉर्ड से डेटा ट्रांसफर करते समय खसरे के नंबर, खातेदार के नाम या सबसे महत्वपूर्ण—**जमीन के रकबे (Area)** में गलती दर्ज हो जाती है।

यदि आपके सरकारी रिकॉर्ड में जमीन का रकबा कम या ज्यादा दर्ज हो गया है, तो आपको धान बेचने (समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन), किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) बनवाने, या जमीन की रजिस्ट्री कराने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

इस लेख में हम आपको बताएंगे कि **छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता (CG Land Revenue Code) के नियमों के अनुसार खसरा या रकबा में त्रुटि सुधार (दुरुस्ती) कैसे कराया जाता है।**

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खसरा या रकबा में किस प्रकार की त्रुटियां होती हैं?

जमीन के दस्तावेजों में मुख्य रूप से निम्न प्रकार की गलतियां देखने को मिलती हैं:

  • **रकबा त्रुटि:** वास्तविक जमीन या पुराने रिकॉर्ड की तुलना में वर्तमान खसरे में रकबा (हेक्टेयर/एकड़) कम या ज्यादा दर्ज होना।
  • **खसरा लोप (गायब होना):** पैतृक जमीन के कई खसरों में से किसी एक खसरा नंबर का ऑनलाइन रिकॉर्ड में दर्ज न होना।
  • **नाम की त्रुटि:** खातेदार के नाम, पिता के नाम या जाति में लिपिकीय (टाइपिंग) गलती होना।
  • **भूमि का स्वरूप:** सिंचित जमीन का असिंचित या इसके विपरीत दर्ज हो जाना।

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दुरुस्ती (त्रुटि सुधार) के लिए कानूनी प्रावधान: धारा 115

छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 की **धारा 115** के तहत खतौनी या फील्ड बुक (खसरा) में लिपिकीय त्रुटियों (Clerical Errors) को सुधारने का अधिकार **तहसीलदार / अनुविभागीय अधिकारी (SDO)** को दिया गया है। यदि यह गलती कंप्यूटर ऑपरेटर या पुराने रिकॉर्ड से डेटा एंट्री के समय हुई है, तो इसे साक्ष्यों के आधार पर सुधारा जा सकता है।

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दुरुस्ती आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज

त्रुटि सुधार का आवेदन पेश करने से पहले नीचे दिए गए दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां (Certified Copies) तैयार कर लें:

  • **वर्तमान खसरा एवं बी-1 (किश्तबंदी) की नकल:** भुइयां पोर्टल या तहसील से प्राप्त प्रति।
  • **मिसल बंदोबस्त रिकॉर्ड:** वर्ष 1929-30 या 1984-85 का पुराना मिसल रिकॉर्ड (यह सबसे मजबूत साक्ष्य होता है)।
  • **अधिकार अभिलेख (पुराना रिकॉर्ड):** डिजिटलीकरण से पहले की ऋण पुस्तिका या पुरानी खतौनी।
  • **रजिस्ट्री कॉपी:** यदि जमीन खरीदी गई है, तो मूल विक्रय पत्र (Registry Deed)।
  • **नक्शा ट्रेस:** संबंधित खसरे का प्रमाणित भू-नक्शा।
  • **पहचान प्रमाण पत्र:** आवेदक का आधार कार्ड, वोटर आईडी और निवास प्रमाण पत्र।

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दुरुस्ती कराने की चरण-दर-चरण प्रक्रिया

चरण 1: आवेदन पत्र तैयार करना

सबसे पहले आपको तहसीलदार न्यायालय के नाम से एक औपचारिक आवेदन पत्र तैयार करना होगा। आवेदन में स्पष्ट लिखें:

  • आपके खसरे का सही रकबा पुराने रिकॉर्ड में क्या था।
  • वर्तमान ऑनलाइन रिकॉर्ड (भुइयां) में क्या गलत दर्ज है।
  • इस गलती के कारण आपको क्या परेशानी हो रही है।
  • आवेदन छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 115 के तहत दुरुस्ती हेतु प्रस्तुत करें।

चरण 2: आवेदन जमा करना (ऑनलाइन/ऑफलाइन)

  • **ऑफलाइन:** आप सीधे अपनी तहसील कार्यालय के राजस्व शाखा या लोक सेवा केंद्र (LSK) में जाकर आवेदन व दस्तावेज जमा कर सकते हैं।
  • **ऑनलाइन:** छत्तीसगढ़ के **RCMS पोर्टल (rcms.cg.nic.in)** के माध्यम से लोक सेवा केंद्र के जरिए ऑनलाइन राजस्व प्रकरण दर्ज कराया जा सकता है। आवेदन जमा होने पर आपको एक प्रकरण क्रमांक (Case Number) मिलेगा।

चरण 3: पटवारी व राजस्व निरीक्षक (RI) जांच

आवेदन दर्ज होने के बाद तहसीलदार द्वारा संबंधित हल्का पटवारी को **प्रतिवेदन (जांच रिपोर्ट)** देने का आदेश दिया जाता है।

  • पटवारी पुराने मिसल रिकॉर्ड, अधिकार अभिलेख और वर्तमान स्थिति का मिलान करेगा।
  • आवश्यकता पड़ने पर मौके पर जाकर जमीन की नाप-जोख (सीमांकन) की जाती है।
  • पटवारी अपनी स्पष्ट रिपोर्ट (प्रतिवेदन) और पंचनामा बनाकर राजस्व निरीक्षक के माध्यम से तहसीलदार न्यायालय को सौंपता है।

चरण 4: सुनवाई और पड़ोसियों को सूचना (इश्तहार)

यदि रकबा सुधारने से आसपास के खसरों पर कोई असर पड़ने की संभावना हो, तो तहसीलदार सीमा से लगे खातेदारों (चौहद्दीदारों) को नोटिस जारी कर सकते हैं या इश्तिहार जारी कर दावा-आपत्ति मंगाते हैं। यदि कोई वैध आपत्ति नहीं आती है, तो प्रक्रिया आगे बढ़ती है।

चरण 5: तहसीलदार का आदेश एवं भुइयां में दुरुस्ती (अमल)

जांच रिपोर्ट और दस्तावेजों से संतुष्ट होने के बाद तहसीलदार **रकबा दुरुस्ती का विधिवत आदेश** पारित करते हैं।

  • आदेश की प्रति हल्का पटवारी को भेजी जाती है।
  • पटवारी अपनी लॉगिन आईडी से भुइयां सॉफ्टवेयर में इस आदेश की प्रविष्टि (अमल/Amal) करता है।
  • तहसीलदार के डिजिटल हस्ताक्षर (Digital Sign) के बाद ऑनलाइन भुइयां पोर्टल पर रकबा व खसरा सही हो जाता है।

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ग्रामीण किसानों के लिए व्यावहारिक सुझाव (LandSeva Practical Tips)

  1. **धान खरीदी सीजन से पहले कराएं दुरुस्ती:** छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का पंजीयन भुइयां पोर्टल के रकबे के आधार पर ही होता है। यदि आपके रकबे में गड़बड़ी है, तो धान उपार्जन शुरू होने से कम से कम 2-3 महीने पहले दुरुस्ती की अर्जी लगा दें।
  2. **मिसल रिकॉर्ड जरूर निकालें:** जिला कलेक्ट्रेट के रिकॉर्ड रूम (अभिलेख कोष्ठार) से अपनी जमीन का पुराना मिसल बंदोबस्त नकल अवश्य निकाल लें। यह दुरुस्ती का सबसे ठोस आधार होता है।
  3. **केस स्टेटस ट्रैक करें:** RCMS CG पोर्टल पर अपने केस नंबर से स्थिति चेक करते रहें ताकि पता चल सके कि फाइल पटवारी प्रतिवेदन पर रुकी है या पेशी पर।
  4. **फौती/बंटवारा के बाद रकबा जांचें:** नामांतरण या फौती दर्ज होने के तुरंत बाद अपना खसरा निकालें और चेक करें कि बटांकन के बाद कुल रकबा कम तो नहीं हुआ है।

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निष्कर्ष

जमीन के खसरा या रकबे में किसी भी प्रकार की त्रुटि को नजरअंदाज न करें। छोटी सी दिखने वाली लिपिकीय त्रुटि भविष्य में जमीन के बंटवारे, बिक्री या सरकारी योजनाओं का लाभ लेते समय बड़ा विवाद बन सकती है। छत्तीसगढ़ शासन के नियमों के तहत धारा 115 की प्रक्रिया बेहद स्पष्ट है। सही दस्तावेज जुटाएं, तहसील में आवेदन करें और पटवारी जांच के उपरांत अपने भू-अभिलेख को पूरी तरह दुरुस्त कराएं ताकि आपकी संपत्ति सुरक्षित रहे।