छत्तीसगढ़ में जमीन से जुड़े महत्वपूर्ण राजस्व दस्तावेजों में किसान किताब (ऋण पुस्तिका) का विशेष महत्व रहा है। इसमें किसान की भूमि से संबंधित जानकारी के साथ-साथ भूमि पर दर्ज ऋण या बंधक जैसी जानकारी भी दर्ज हो सकती है।

पहले किसान किताब मुख्य रूप से कागजी रूप में उपलब्ध होती थी। अब छत्तीसगढ़ में राजस्व अभिलेखों के डिजिटलीकरण के साथ डिजिटल किसान किताब की व्यवस्था भी विकसित की जा रही है। भुइयां भू-अभिलेख प्रणाली में डिजिटल किसान किताब के डिजिटल हस्ताक्षर से संबंधित रिकॉर्ड और प्रक्रियाएं दिखाई देती हैं।

इस लेख में हम समझेंगे कि किसान किताब क्या है, इसमें कौन-सी जानकारी होती है, इसका उपयोग कहां होता है, डिजिटल किसान किताब क्या है और वर्तमान डिजिटल व्यवस्था के बाद इसमें क्या बदलाव आया है।


किसान किताब (ऋण पुस्तिका) क्या है?

किसान किताब, जिसे सामान्य रूप से ऋण पुस्तिका भी कहा जाता है, भूमि और उससे संबंधित राजस्व विवरणों से जुड़ा महत्वपूर्ण दस्तावेज है।

इसमें किसान या भूमिस्वामी की भूमि से संबंधित विवरण तथा भूमि पर दर्ज ऋण/बंधक आदि की जानकारी उपलब्ध हो सकती है।

किसान किताब में दर्ज विवरण भूमि के राजस्व रिकॉर्ड से संबंधित होते हैं। इसलिए जमीन खरीदने, बेचने, ऋण लेने, कृषि संबंधी कार्यों तथा अन्य सरकारी प्रक्रियाओं में भूमि रिकॉर्ड का सही होना महत्वपूर्ण है।

किसान किताब में सामान्यतः कौन-सी जानकारी होती है?

किसान किताब में उपलब्ध विवरण रिकॉर्ड और व्यवस्था के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। सामान्यतः इसमें निम्न प्रकार की जानकारी देखने को मिल सकती है:

  • भूमिस्वामी/खातेदार का नाम
  • पिता या पति का नाम
  • गांव और पटवारी हल्का
  • खाता एवं खसरा संबंधी विवरण
  • भूमि का रकबा
  • भूमि का प्रकार
  • भूमि पर दर्ज ऋण या बंधक संबंधी विवरण
  • संबंधित राजस्व प्रविष्टियां

इसलिए किसान किताब को केवल एक सामान्य पहचान दस्तावेज के रूप में नहीं, बल्कि भूमि और ऋण से संबंधित राजस्व रिकॉर्ड के रूप में समझना अधिक उचित है।


किसान किताब का उपयोग किन कामों में होता है?

किसान किताब का उपयोग अलग-अलग समय पर भूमि और कृषि से संबंधित प्रक्रियाओं में किया जा सकता है। उदाहरण के लिए:

1. कृषि ऋण और KCC

कृषि ऋण या किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) जैसी बैंकिंग प्रक्रियाओं में बैंक किसान से भूमि संबंधी दस्तावेज मांग सकता है। किन दस्तावेजों की आवश्यकता होगी, यह संबंधित बैंक और ऋण प्रक्रिया पर निर्भर करता है।

2. भूमि पर ऋण या बंधक की जानकारी

यदि भूमि किसी बैंक या वित्तीय संस्था के पास ऋण के लिए बंधक रखी गई है, तो संबंधित राजस्व रिकॉर्ड में उसका प्रभार दर्ज हो सकता है।

3. भूमि संबंधी सरकारी प्रक्रियाएं

भूमि के नामांतरण, बंटवारा, रिकॉर्ड सुधार और अन्य राजस्व प्रक्रियाओं में संबंधित भूमि रिकॉर्ड की आवश्यकता पड़ सकती है।

हालांकि प्रत्येक सेवा में किसान किताब की आवश्यकता एक जैसी नहीं होती। इसलिए किसी विशेष सरकारी सेवा के लिए वर्तमान नियम और आवश्यक दस्तावेज पहले जांच लेना चाहिए।


अब डिजिटल किसान किताब क्या है?

छत्तीसगढ़ में भूमि अभिलेखों को डिजिटल बनाने की प्रक्रिया के साथ डिजिटल किसान किताब की व्यवस्था भी लागू की जा रही है।

भुइयां पोर्टल के आधिकारिक सिस्टम में वर्ष 2026 के रिकॉर्ड में डिजिटल किसान किताब पर डिजिटल हस्ताक्षर और उससे संबंधित PDF जैसी प्रक्रियाओं के उदाहरण दिखाई देते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि किसान किताब को डिजिटल रूप में तैयार और डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित करने की व्यवस्था सिस्टम में मौजूद है।

डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य कागजी रिकॉर्ड पर निर्भरता कम करना और भूमि संबंधी अभिलेखों को ऑनलाइन प्रणाली में अधिक व्यवस्थित रूप से उपलब्ध कराना है।

डिजिटल किसान किताब के क्या फायदे हैं?

डिजिटल किसान किताब व्यवस्था से संभावित रूप से:

  • रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखना आसान होता है।
  • रिकॉर्ड की डिजिटल कॉपी उपलब्ध हो सकती है।
  • डिजिटल हस्ताक्षर के माध्यम से रिकॉर्ड का सत्यापन किया जा सकता है।
  • भूमि और ऋण से संबंधित जानकारी को ऑनलाइन राजस्व प्रणाली से जोड़ा जा सकता है।
  • रिकॉर्ड तैयार करने और उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकती है।

हालांकि किसी विशेष काम के लिए डिजिटल किसान किताब स्वीकार होगी या अतिरिक्त दस्तावेज की आवश्यकता होगी, यह संबंधित सेवा के वर्तमान नियमों पर निर्भर करेगा।


डिजिटल किसान किताब और Farmer Registry का क्या संबंध है?

छत्तीसगढ़ में Farmer Registry / AgriStack से संबंधित डिजिटल व्यवस्था भी विकसित की गई है। सरकारी जानकारी के अनुसार Farmer Registry में किसान की पहचान और भूमि से संबंधित जानकारी को डिजिटल रूप से जोड़ने का उद्देश्य है।

Farmer Registry के लिए किसानों से कृषि भूमि से संबंधित दस्तावेज जैसे B-I, खतौनी और ऋण पुस्तिका, आधार तथा मोबाइल नंबर जैसी जानकारी मांगी जा सकती है। सरकारी जानकारी में Farmer ID को धान खरीदी, PM-KISAN, फसल बीमा, KCC और अन्य कृषि योजनाओं से जोड़ने की बात कही गई है।

इसलिए वर्तमान व्यवस्था को इस तरह समझ सकते हैं:

कागजी किसान किताब → डिजिटल भूमि रिकॉर्ड → डिजिटल किसान किताब → Farmer Registry/Farmer ID

ये सभी व्यवस्थाएं एक-दूसरे से संबंधित हो सकती हैं, लेकिन इनका उद्देश्य और उपयोग अलग-अलग है।


क्या अब किसान किताब की जरूरत नहीं है?

ऐसा कहना सही नहीं होगा कि डिजिटल व्यवस्था आने के बाद किसान किताब पूरी तरह समाप्त हो गई है।

डिजिटल किसान किताब और ऑनलाइन भूमि रिकॉर्ड की सुविधा बढ़ने से रिकॉर्ड प्राप्त करने और सत्यापन की प्रक्रिया में बदलाव आया है, लेकिन किसी विशेष सेवा में कौन-सा दस्तावेज आवश्यक है, यह उस सेवा के वर्तमान नियमों पर निर्भर करता है।

इसलिए किसान को बैंक, सहकारी समिति, सरकारी योजना या किसी राजस्व सेवा के लिए आवेदन करने से पहले उस सेवा की वर्तमान दस्तावेज सूची देखनी चाहिए।


कृषि भूमि की रजिस्ट्री में किसान किताब को लेकर क्या बदलाव हुआ?

यह 2026 में किसानों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव है।

छत्तीसगढ़ शासन के पंजीयन विभाग ने 17 अक्टूबर 2025 को कृषि भूमि की खरीदी-बिक्री की रजिस्ट्री के लिए ऋण पुस्तिका (किसान किताब) प्रस्तुत करने की अनिवार्यता समाप्त करने की घोषणा की थी।

शासन के अनुसार राजस्व विभाग के ऑनलाइन रिकॉर्ड को पंजीयन सॉफ्टवेयर से एकीकृत किया गया है और डिजिटल सत्यापन तथा ऑटो-म्यूटेशन जैसी तकनीकी व्यवस्था का उपयोग किया जा रहा है।

इसलिए पुराने समय की तरह यह कहना कि:

“कृषि भूमि की रजिस्ट्री के लिए किसान किताब अनिवार्य है।”

वर्तमान व्यवस्था के संदर्भ में सही नहीं होगा।

हालांकि इसका अर्थ यह भी नहीं है कि किसान किताब का महत्व समाप्त हो गया है। यह अभी भी भूमि और ऋण संबंधी महत्वपूर्ण रिकॉर्ड हो सकती है और अलग-अलग सेवाओं में इसकी आवश्यकता संबंधित नियमों के अनुसार हो सकती है।


किसान किताब में गलती हो तो क्या करें?

यदि किसान किताब या ऑनलाइन भूमि रिकॉर्ड में नाम, खसरा, रकबा, खातेदार या अन्य जानकारी में गलती दिखाई देती है, तो सबसे पहले संबंधित भूमि रिकॉर्ड की वर्तमान स्थिति की जांच करें।

गलती के प्रकार के अनुसार संबंधित पटवारी, राजस्व निरीक्षक या तहसील कार्यालय में सुधार की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

यदि रिकॉर्ड में सुधार के लिए किसी विशेष राजस्व प्रकरण या आदेश की आवश्यकता है, तो संबंधित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन करना होता है।

ऑनलाइन रिकॉर्ड में दिखाई देने वाली गलती और मूल राजस्व अभिलेख की स्थिति अलग-अलग हो सकती है। इसलिए केवल ऑनलाइन रिकॉर्ड देखकर निष्कर्ष निकालने के बजाय संबंधित राजस्व कार्यालय से सत्यापन करना उचित है।


किसान किताब खो जाए तो क्या करें?

पुरानी कागजी किसान किताब खो जाने, खराब होने या उपलब्ध न होने की स्थिति में डुप्लीकेट या संबंधित रिकॉर्ड प्राप्त करने की प्रक्रिया स्थानीय राजस्व कार्यालय की वर्तमान व्यवस्था के अनुसार हो सकती है।

इसलिए FIR, गुमशुदगी रिपोर्ट, शपथ पत्र, स्टाम्प आदि को हर मामले में अनिवार्य बताना उचित नहीं है। आवश्यक दस्तावेज और प्रक्रिया संबंधित कार्यालय तथा वर्तमान नियमों के अनुसार अलग हो सकती है।

किसान को आवेदन करने से पहले संबंधित तहसील/राजस्व कार्यालय से वर्तमान प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेज की जानकारी लेनी चाहिए।


किसान अपने भूमि रिकॉर्ड में क्या-क्या जांचें?

किसान को समय-समय पर अपने भूमि रिकॉर्ड की जानकारी जांचते रहना चाहिए। विशेष रूप से:

  • भूमिस्वामी/खातेदार का नाम
  • खसरा नंबर
  • रकबा
  • भूमि की किस्म
  • खाते की स्थिति
  • संयुक्त खातेदारों की जानकारी
  • बैंक ऋण या बंधक की प्रविष्टि
  • नामांतरण के बाद रिकॉर्ड में हुआ परिवर्तन
  • डिजिटल हस्ताक्षरित रिकॉर्ड की उपलब्धता

यदि इनमें कोई विसंगति दिखाई देती है तो समय रहते संबंधित राजस्व कार्यालय से संपर्क करना बेहतर होता है।


भुइयां पोर्टल और डिजिटल भूमि रिकॉर्ड

छत्तीसगढ़ का भुइयां भू-अभिलेख सिस्टम राज्य के भूमि रिकॉर्ड से संबंधित डिजिटल सेवाओं का महत्वपूर्ण माध्यम है।

इसमें भूमि से संबंधित विभिन्न रिकॉर्ड और डिजिटल सेवाएं उपलब्ध हैं। डिजिटल किसान किताब से संबंधित सिस्टम प्रविष्टियां भी भुइयां के आधिकारिक रिकॉर्ड में दिखाई देती हैं।

हालांकि पोर्टल पर उपलब्ध सुविधा और किसी दस्तावेज की डाउनलोड/डिजिटल हस्ताक्षर स्थिति समय-समय पर तकनीकी या प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार बदल सकती है।


निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ में किसान किताब लंबे समय से किसानों के भूमि और ऋण संबंधी रिकॉर्ड का महत्वपूर्ण दस्तावेज रही है। अब भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण के साथ डिजिटल किसान किताब की व्यवस्था भी सामने आ रही है।

इसके साथ ही Farmer Registry और AgriStack जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं के माध्यम से किसान और उसकी भूमि से संबंधित जानकारी को डिजिटल रूप से जोड़ने का काम भी किया जा रहा है।

वहीं, अक्टूबर 2025 से कृषि भूमि की रजिस्ट्री के लिए ऋण पुस्तिका प्रस्तुत करने की अनिवार्यता समाप्त किए जाने के बाद इसकी भूमिका को पुराने नियमों के आधार पर समझना उचित नहीं होगा।

इसलिए आज किसान के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात है कि उसकी भूमि का मूल राजस्व रिकॉर्ड, ऑनलाइन रिकॉर्ड, किसान संबंधी डिजिटल पहचान और संबंधित दस्तावेज सही एवं अद्यतन हों।