छत्तीसगढ़ में जमीन का सीमांकन (Demarcation) कैसे कराएं? जानिए पूरी प्रक्रिया, दस्तावेज और नियम

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में जमीन से जुड़े विवादों का एक बड़ा कारण मेढ़ या सीमा (Boundary) का न सही होना होता है। कई बार पड़ोसी किसान द्वारा जमीन दबा लेने, मेढ़ काट लेने या नया प्लॉट/खेत खरीदने पर वास्तविक क्षेत्रफल का पता न होने के कारण विवाद खड़े हो जाते हैं।

अगर आप भी अपनी जमीन या खेत की सही सीमा तय करना चाहते हैं, तो इसके लिए **'सीमांकन' (Land Demarcation)** सबसे कानूनी और सुरक्षित तरीका है। **LandSeva (लैंडसेवा)** के इस लेख में हम आपको छत्तीसगढ़ राजस्व विभाग के नियमों के अनुसार सीमांकन की पूरी ऑनलाइन और ऑफलाइन प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज़ और ध्यान रखने योग्य बातें बताएंगे।

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छत्तीसगढ़ में जमीन का सीमांकन (Demarcation) कराने की पूरी प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज और नियमों की विस्तृत जानकारी नीचे दी गई है:


जमीन का सीमांकन (Demarcation) क्या है?

जमीन का सीमांकन वह कानूनी प्रक्रिया है जिसके तहत राजस्व विभाग के अधिकारी (जैसे राजस्व निरीक्षक - RI और पटवारी) सरकारी भू-मानचित्र (Map) और खसरे के आधार पर आपकी जमीन की सही चौहद्दी (सीमा) नापकर तय करते हैं। सीमांकन के बाद जमीन की मेढ़ पर स्थायी निशान (मुनारा या पिलर) लगा दिए जाते हैं, जिससे भविष्य में अतिक्रमण या विवाद की संभावना खत्म हो जाती है।


छत्तीसगढ़ में सीमांकन कराना क्यों जरूरी है?

  • मेढ़ विवाद होने पर: यदि पड़ोसी किसान या भू-स्वामी ने आपकी मेढ़ काट ली है या जमीन पर कब्जा कर लिया है।
  • नई जमीन या प्लॉट खरीदने पर: रजिस्ट्री कराने के बाद जमीन का वास्तविक कब्जा प्राप्त करने के लिए।
  • जमीन बेचने से पहले: खरीदार को जमीन का सटीक क्षेत्रफल और चौहद्दी स्पष्ट दिखाने के लिए।
  • फेंसिंग या बाउंड्री वॉल बनाने के लिए: ताकि बिना किसी कानूनी अड़चन के सुरक्षित घेराबंदी की जा सके।
  • बैंक लोन या नामांतरण के समय: जब बैंक या विभाग द्वारा सटीक नक्शे की मांग की जाती है।

सीमांकन के लिए आवश्यक दस्तावेज (Required Documents)

छत्तीसगढ़ में सीमांकन आवेदन के साथ निम्नलिखित दस्तावेज होना अनिवार्य है:


  1. खसरा की नकल: वर्तमान वित्तीय वर्ष का बी-1 (B-1) और खसरा।
  2. जमीन का नक्शा: पटवारी द्वारा प्रमाणित या भुइयां पोर्टल से प्राप्त डिजिटल नक्शा (Shajra Map)।
  3. स्वामित्व दस्तावेज: रजिस्ट्री की प्रति या ऋण पुस्तिका (किसान किताब)।
  4. पहचान पत्र: आवेदक का आधार कार्ड, वोटर आईडी या पैन कार्ड।
  5. मोबाइल नंबर: जिस पर आवेदन की प्रगति और एसएमएस प्राप्त हो सके।


छत्तीसगढ़ में सीमांकन के लिए आवेदन कैसे करें?

आप इसके लिए ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आवेदन कर सकते हैं:


1. ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया (भुइयां पोर्टल / ई-डिस्ट्रिक्ट):

  • छत्तीसगढ़ राजस्व विभाग के आधिकारिक पोर्टल 'भुइयां' (Bhuian) या 'लोक सेवा केंद्र' (CGCIT / e-District) की वेबसाइट पर जाएं।
  • 'नागरिक सेवाएं' (Citizen Services) सेक्शन में जाकर 'सीमांकन हेतु आवेदन' विकल्प चुनें।
  • अपना जिला, तहसील, पटवारी हल्का और ग्राम का चयन करें।
  • अपना खसरा नंबर दर्ज कर जमीन का विवरण सत्यापित करें।
  • मांगे गए विवरण भरें और आवश्यक दस्तावेज (खसरा, बी-1, नक्शा, आधार) अपलोड करें।
  • निर्धारित आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन करें और आवेदन संदर्भ संख्या (Application Reference Number) सुरक्षित रख लें।


2. ऑफलाइन आवेदन प्रक्रिया (तहसील कार्यालय):

  • अपने क्षेत्र के तहसीलदार महोदय के नाम एक सादे कागज पर लिखित आवेदन तैयार करें।
  • आवेदन पत्र में अपना नाम, पूरा पता, खसरा नंबर, कुल रकबा और सीमांकन कराने का स्पष्ट कारण लिखें।
  • आवेदन के साथ खसरा, बी-1, नक्शा और पहचान पत्र की छायाप्रति संलग्न करें।
  • तहसील कार्यालय की आवक-जावक शाखा में आवेदन जमा कर पावती (Receipt) अवश्य प्राप्त करें।

सीमांकन शुल्क और चालान (Challan)

  • छत्तीसगढ़ में भूमि के सीमांकन के लिए आवेदक को निर्धारित सरकारी शुल्क (आमतौर पर ₹50 का चालान) जमा करना होता है।
  • यह चालान या शुल्क की रसीद सीमांकन के मूल आवेदन पत्र के साथ संलग्न करना अनिवार्य होता है, इसके बिना आवेदन प्रक्रिया पूरी नहीं मानी जाती है।

सीमांकन की मैदानी प्रक्रिया (On-Field Demarcation Process)

  1. नोटिस जारी होना: तहसीलदार द्वारा आवेदन स्वीकृत किए जाने के बाद, संबंधित राजस्व निरीक्षक (RI) और हल्का पटवारी को सीमांकन के निर्देश दिए जाते हैं। इसके तहत आवेदक, पड़ोसी भू-स्वामियों और संबंधित पक्षों को नियत तिथि पर उपस्थित रहने के लिए विधिवत नोटिस (सूचना पत्र) जारी किया जाता है ताकि सभी की मौजूदगी में पारदर्शी तरीके से नाप-जोख हो सके।
  2. मौके पर नाप-जोख: निर्धारित तिथि पर राजस्व टीम मौके पर पहुंचकर आधुनिक उपकरणों या जरीब (Chain) की मदद से नक्शे के अनुसार सीमा का निर्धारण करती है।
  3. प्रतिवेदन प्रस्तुति: सीमांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद राजस्व निरीक्षक (RI) और पटवारी अपनी जाँच रिपोर्ट मय 'नजरी नक्शा' (Trace Map) के तहसीलदार न्यायालय में प्रस्तुत करते हैं, जिसके आधार पर आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई पूरी की जाती है।