छत्तीसगढ़ में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का गैर-क्रीमीलेयर (Non-Creamy Layer) जाति प्रमाण पत्र बनवाते समय अक्सर आवेदकों और राजस्व अधिकारियों के बीच आय की गणना को लेकर भ्रम की स्थिति बन जाती है। कई बार शासकीय कर्मचारियों या कृषकों के बच्चों के आवेदन यह कहकर अटका दिए जाते हैं कि उनकी कुल वार्षिक आय निर्धारित सीमा से अधिक है।
यदि आप भी इस समस्या का सामना कर रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए है। इस लेख में छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) और राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा समय-समय पर जारी किए गए सभी परिपत्रों (Circulars) और उनकी तिथियों के साथ पूरी कानूनी स्थिति स्पष्ट की गई है।
1. क्रीमीलेयर मापदंड का मूल नियम क्या है?
छत्तीसगढ़ शासन सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र क्रमांक एफ 9-3/2001/आ.प्र./1-3 दिनांक 19.09.2013 (एवं पूर्व परिपत्रों) के तहत अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए क्रीमीलेयर के मापदंड तय किए गए हैं।
क्रीमीलेयर के आय मापदंड (प्रवर्ग-6: आय/संपत्ति आंकलन) का मुख्य नियम यह है कि यदि किसी आवेदक के माता-पिता की अन्य स्रोतों से कुल वार्षिक आय लगातार तीन वर्षों तक निर्धारित सीमा से अधिक है, तभी वे क्रीमीलेयर में आएंगे। लेकिन इसमें सबसे महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण यह दिया गया है कि:
"वेतन से प्राप्त आय" और "कृषि भूमि से प्राप्त आय" को आपस में नहीं जोड़ा जाएगा।
2. 'संयुक्त रूप से' शब्द का विलोपन (सत्य और स्पष्ट नियम)
शुरुआती परिपत्रों में आय आंकलन के लिए "संयुक्त रूप से" शब्द का प्रयोग होने से अधिकारियों में भ्रांति फैल गई थी कि वेतन और कृषि आय को जोड़कर देखा जाए या नहीं। राज्य शासन ने इसे पूरी तरह स्पष्ट करते हुए निम्नलिखित संशोधन जारी किए:
GAD परिपत्र दिनांक 02.06.2011: सामान्य प्रशासन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन ने स्पष्ट किया कि भारत सरकार (DoPT) के कार्यालयीन ज्ञापन क्रमांक 36033/3/2004-स्था.(आरक्षण) दिनांक 14.10.2008 के अनुसार वेतन या कृषि भूमि से प्राप्त आय को नहीं जोड़ा जाना है। अतः परिपत्र में उल्लिखित "संयुक्त रूप से" शब्दों को विलोपित कर दिया गया।
GAD परिपत्र दिनांक 18.10.2019 / 28.11.2019: भारत सरकार के DoPT ज्ञापन (दिनांक 14.10.2004 व 2008) के संदर्भ में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा पुनः स्पष्ट किया गया (पत्र क्र. 1466/1158/2019/आ.प्र./1-3 नवा रायपुर दिनांक 28.11.2019) कि पूर्व परिपत्र दिनांक 19.09.2013 की कंडिका 6(ख)(i) में उल्लिखित "संयुक्त रूप से" शब्दों को पूर्णतः विलोपित माना जाए।
मुख्य निष्कर्ष: यदि किसी आवेदक के माता-पिता की वेतन से आय कितनी भी हो और कृषि से आय भी कितनी भी हो, लेकिन अन्य स्रोतों (व्यापार, ब्याज, संपत्ति आदि) से आय निर्धारित सीमा से कम है, तो वे Non-Creamy Layer (गैर-क्रीमीलेयर) के पात्र हैं।
3. राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के कड़े निर्देश (Circular Dates के साथ)
जब मैदानी स्तर पर गलत गणना के कारण OBC अभ्यर्थियों को परेशानी हुई, तो छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने कड़ा रुख अपनाया और सभी कलेक्टरों व तहसीलदारों को परिपत्र जारी किए:
आयोग पत्र क्रमांक 47/पिवआ/2020 (दिनांक 13/01/2020): समस्त कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदारों को निर्देश जारी कर शासन के परिपत्र दिनांक 19.09.2013 एवं 28.11.2019 का शत-प्रतिशत पालन करने को कहा गया।
आयोग पत्र क्रमांक 597/पिवआ/2020 (दिनांक 05/10/2020): पुनः सभी राजस्व अधिकारियों को स्मरण कराया गया कि "वेतन एवं कृषि आय" को जोड़ा जाना नियम विरुद्ध है। शासन के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए ही OBC जाति प्रमाण पत्र जारी करना सुनिश्चित करें।
कलेक्टर कार्यालय राजनांदगांव पत्र क्र. 3454/आजाक/जा.स./2020-21 (दिनांक 25/02/2021): जिला स्तरीय जाति सत्यापन समिति द्वारा समस्त SDM एवं तहसीलदारों को नियमानुसार कार्यवाही हेतु निर्देशित किया गया।
SDO (राजस्व) मोहला ज्ञापन क्र. 196/अनु.अधि./स्टेनो/2021 (दिनांक 05/03/2021): अनुविभागीय अधिकारी द्वारा अधीनस्थ तहसीलदारों (अं.चौकी/मोहला/मानपुर) को क्रीमीलेयर मापदंडों के अनुसार ही OBC प्रमाण पत्र जारी करने हेतु आदेशित किया गया।
4. क्रीमीलेयर अपवर्जन नियम: किस पर लागू होता है और किस पर नहीं?
(A) इन पदों पर स्थित व्यक्तियों के बच्चे क्रीमीलेयर में आएंगे (पात्र नहीं होंगे):
संवैधानिक पद धारक: राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, सुप्रीम कोर्ट/हाईकोर्ट जज, UPSC/CGPSC अध्यक्ष व सदस्य आदि।
वर्ग-1 / समूह 'क' (Class-I) अधिकारी: सीधी भर्ती द्वारा नियुक्त।
वर्ग-2 / समूह 'ख' (Class-II) अधिकारी: यदि माता-पिता दोनों Class-II हैं, या पिता 40 वर्ष की आयु से पूर्व Class-I में पदोन्नत हो गए हों।
सशस्त्र बल: सेना में कर्नल या उससे ऊपर के रैंक के अधिकारी।
(B) विशेष छूट एवं राहत नियम (जो क्रीमीलेयर में नहीं आते):
तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी: यदि पिता Class-III (वर्ग-3) या Class-IV (वर्ग-4) कर्मचारी हैं और वे 40 वर्ष की आयु के बाद Class-I बनते हैं, तो भी उनके बच्चे क्रीमीलेयर में नहीं आएंगे।
अभ्यर्थी की स्वयं की आय: DoPT के ज्ञापन 14.10.2004 (कंडिका 8) के अनुसार क्रीमीलेयर का निर्धारण केवल अभ्यर्थी के माता-पिता की स्थिति/आय के आधार पर होता है, अभ्यर्थी या उसके पति/पत्नी की आय से नहीं।